अगर इम्यून सिस्टम कमज़ोर हो, या छोटी सी बीमारी से लेकर कैंसर तक हो, मोटापा हो या हृदय की समस्या, अगर व्यक्ति मौत के मुंह में भी चला गया हो और डॉक्टर जवाब दे दें तो भी ये जूस व्यक्ति को मौत के मुंह से बाहर लाने की क्षमता रखते हैं. आइये जाने इनके बारे में.

गाजर का जूस

गाजर बहुत ही गुणकारी है, गाजर में जीवन दायिनी शक्ति है, गाजर में दूध के समान गुण विद्यमान हैं और गाजर का रस दूध से भी उत्तम है, गाजर में माता के दूध के समान खनिज लवण पाए जाते हैं। इसके उपयोग से हमारी सेहत बहुत बढ़िया रह सकती है। गाजर का उपयोग इसका रस निकाल कर या सब्जी बनाकर किया जा सकता है।

गाजर का जूस नियमित पीने से हमारी आँखों के छोटे छोटे रोगों से लेकर मोतियाबिंद जैसे रोग नहीं होते। गाजर के नियमित सेवन से ब्रैस्ट कैंसर, पेट के कैंसर और फेफड़ों के कैंसर से बचा जा सकता है और अगर ये रोग हो जाए तो इसके सेवन से बहुत जल्दी रिकवरी होती है। लीवर पेट आँतों और दांतों मसुडो के रोगों में भी बहुत लाभकारी है.

पालक का जूस

पालक विटामिन K, विटामिन A (करोटेनॉइड्स के रूप में), मैंगनीज, मैग्नीशियम, आयरन, कैल्शियम, एमिनो एसिड तथा फोलिक एसिड फोलेट, कॉपर, विटामिन B2, विटामिन B6, विटामिन E, कैल्शियम, पोटैशियम, और विटामिन C का अति उत्कृष्ट स्त्रोत है। कच्चा पालक खाने से कड़वा और खारा ज़रूर लगता है, परन्तु ये गुणकारी होता है। गुणों के मामले में पालक का शाक सब शाकों से बढ़ चढ़कर है। इसका रस यदि पीने में अच्छा न लगे तो इसके रस में आटा गूंथकर रोटी बनाकर खानी चाहिए। पालक रक्त में लाल कण बढ़ाता है। कब्ज दूर करता है। पालक, दाल व् अन्य सब्जियों के साथ खाएं।

पत्तागोभी का जूस

पत्तागोभी देखने में जितनी साधारण हैं उतनी ही गुणों में अमृत के समान हैं, अनेक कष्ट साध्य रोग जैसे कैंसर, कोलाइटिस, हार्ट, मोटापा, अलसर, ब्लड क्लॉटिंग रक्त के थक्के जमने में, उच्च रक्तचाप, नींद की कमी, पथरी, मूत्र की रुकावट में पत्तागोभी बहुत लाभकारी हैं। इसकी सब्जी भी घी से छौंककर बनानी चाहिए। पत्तागोभी को करमकल्ला के नाम से भी पुकारा जाता हैं। इसका रस, सलाद और सब्जी सभी गुणकारी हैं। रोगी व्यक्ति को नियमित इसके जूस का सेवन करना चाहिए. और अगर स्वस्थ व्यक्ति भी इसका सेवन करता है तो उसका स्वास्थय नियमित बना रहता है.

गेंहू के जवारों और गिलोय का मिक्स जूस

अगर आपको कोई ऐसा रोग हो गया हो जो असाध्य हो या आपको लगता हो के ये आपकी जान लेकर ही जायेगा तो बिना विलम्ब किये रोगी को ये जूस पिलाना शुरू करना चाहिए, ये शरीर में जाते ही शरीर से विजातीय पदार्थ निकालकर शारीर में अमृत का संचार करता है, कैंसर, हृदय की ब्लॉकेज, किडनी के रोगों, लीवर, ब्लड शुगर जैसे अनेक रोगों के लिए ये बेहतरीन है. इस जूस के बारे के गुणों के बारे में जितना लिखा जाए उतना ही कम है. गेंहू के जवारो को आयुर्वेद में ग्रीन ब्लड और पृथ्वी की संजीवनी के नाम से सम्भोधित किया जाता है और गिलोय को अमृता के नाम से जाना जाता है, इन दोनों को मिक्स कर के बनाया गया जूस अपने आप में अमृत लिए रहता है



मित्रो जिसको भी शरीर मे पथरी है वो चुना कभी ना खाएं ! (काफी लोग पान मे डाल कर खा जाते हैं )
क्योंकि पथरी होने का मुख्य कारण आपके शरीर मे अधिक मात्रा मे कैलशियम का होना है | मतलब जिनके शरीर मे पथरी हुई है उनके शरीर मे जरुरत से अधिक मात्रा मे कैलशियम है लेकिन वो शरीर मे पच नहीं रहा है वो अलग बात हे| इसलिए आप चुना खाना बंद कर दीजिए|

आयुर्वेदिक इलाज !
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पखानबेद नाम का एक पौधा होता है ! उसे पथरचट भी कुछ लोग बोलते है ! उसके 10 पत्तों को 1 से डेड गिलास पानी मे उबाल कर काढ़ा बना ले ! मात्र 7 से 15 दिन मे पूरी पथरी खत्म !! और कई बार तो इससे भी जल्दी खत्म हो जाती !!! आप दिन मे 3 बार पत्ते 3 पत्ते सीधे भी खा सकते हैं !

होमियोपेथी इलाज !

अब होमियोपेथी मे एक दवा है ! वो आपको किसी भी होमियोपेथी के दुकान पर मिलेगी उसका नाम हे BERBERIS VULGARIS ये दवा के आगे लिखना है MOTHER TINCHER ! ये उसकी पोटेंसी हे|
वो दुकान वाला समझ जायेगा| यह दवा होमियोपेथी की दुकान से ले आइये| (स्वदेशी कंपनी SBL की बढ़िया असर करती है )

(ये BERBERIS VULGARIS दवा भी पथरचट नाम के पोधे से बनी है बस फर्क इतना है ये dilutions form मे हैं पथरचट पोधे का botanical name BERBERIS VULGARIS ही है )

अब इस दवा की 10-15 बूंदों को एक चौथाई (1/ 4) कप गुण गुने पानी मे मिलाकर दिन मे चार बार (सुबह,दोपहर,शाम और रात) लेना है | चार बार अधिक से अधिक और कमसे कम तीन बार|इसको लगातार एक से डेढ़ महीने तक लेना है कभी कभी दो महीने भी लग जाते है |

इससे जीतने भी stone है ,कही भी हो गोलब्लेडर gall bladder )मे हो या फिर किडनी मे हो,या युनिद्रा के आसपास हो,या फिर मुत्रपिंड मे हो| वो सभी स्टोन को पिगलाकर ये निकाल देता हे|

99% केस मे डेढ़ से दो महीने मे ही सब टूट कर निकाल देता हे कभी कभी हो सकता हे तीन महीने भी हो सकता हे लेना पड़े|तो आप दो महीने बाद सोनोग्राफी करवा लीजिए आपको पता चल जायेगा कितना टूट गया है कितना रह गया है | अगर रह गया हहै तो थोड़े दिन और ले लीजिए|यह दवा का साइड इफेक्ट नहीं है |

और यही दवा से पित की पथरी (gallbladder stones ) भी ठीक हो जाती है ! जिसे आधुनिक डाक्टर पित का कैंसर बोल देते हैं !
ये तो हुआ जब stone टूट के निकल गया अब दोबारा भविष्य मे यह ना बने उसके लिए क्या??? क्योंकि कई लोगो को बार बार पथरी होती है |एक बार stone टूट के निकल गया अब कभी दोबारा नहीं आना चाहिए इसके लिए क्या ???

इसके लिए एक और होमियोपेथी मे दवा है CHINA 1000|
प्रवाही स्वरुप की इस दवा के एक ही दिन सुबह-दोपहर-शाम मे दो-दो बूंद सीधे जीभ पर डाल दीजिए|सिर्फ एक ही दिन मे तीन बार ले लीजिए फिर भविष्य मे कभी भी स्टोन नहीं बनेगा|

और एक बात इस BERBERIS VULGARIS से पीलिया jaundice भी ठीक होता है !



जो लोग मोटापे से परेशान हैं और मोटापे को दूर करने के लिए अनेक तरह के प्रयोग और पैसे बर्बाद कर के थक चुके हैं तो हम बता दें के ये प्रयोग मोटापे के लिए काल साबित होगा। आप अपने रिजल्ट हमारे साथ ज़रूर शेयर करें। बिलकुल साधारण सा दिखने वाला ये प्रयोग सिर्फ थोड़े से दिनों में अपना रिजल्ट आपको दिखा जायेगा। और बड़ी बात ये है के ये नुस्खा बिलकुल आसान है। आइये जाने

हर शाम को एक चम्मच जीरा साफ़ पीने के पानी में भिगो कर रख दीजिये। सुबह खाली पेट ये जीरा चबा चबा कर खा लीजिये और इस बचे हुए पानी को चाय की तरह गर्म करें और इसमें आधा निम्बू निचोड़ कर इसमें एक चम्मच शहद मिला कर इस पेय के घूँट घूँट कर चाय की तरह पियें।
जीरा शरीर में हमारे द्वारा ग्रहण की गयी वसा को शरीर में अवशोषित नहीं होने देता। और गर्म पानी में निम्बू शरीर में जमी हुयी चर्बी को काटता है। इस कारण से प्रयोग मोटापे के लिए चमत्कार है।
और ध्यान रखें, इस प्रयोग के करते समय आप नाश्ता ना करें। नहीं तो मनचाहा रिजल्ट नहीं मिलेगा। सुबह ये पीने के बाद सीधे दोपहर का खाना खाएं। और खाने के पहले एक प्लेट सलाड खाएं। और भोजन में हरी सब्जियों का प्रयोग करें। और रात को भी सोने से 2-3 घंटे पहले भोजन कर लें।
दोपहर और रात के भोजन के तुरंत बाद एक गिलास गर्म पानी चाय की तरह आधा नीम्बू निचोड़ कर पीयें। भोजन के साथ ठंडा पानी बिलकुल नहीं पीना। मैदे से बानी हुयी वस्तुओ से परहेज करें। मीठा और चीनी मोटापे में ज़हर के समान हैं। अनाज भी चोकर वाला (आटे को छानने से जो कचरा निकालते हैं वो चोकर होता है उसको मत निकाले) इस्तेमाल करें। फलों का जूस पीने की बजाय फल खाने चाहिए, इससे फाइबर भी मिल जाता है और जल्दी भूख नहीं लगती।
शीघ्र रिजल्ट पाने वाले व्यक्तियों को इसके साथ साथ में कुछ व्यायाम ज़रूर करना चाहिये। विशेषकर पश्चिमोत्तनासन, कपाल भाति और हो सके तो रनिंग या जॉगिंग ज़रूर करें। आपको एक महीने में ही रिजल्ट मिल जायेगा।



आज हम आपको एक अद्भुत घरेलु नुस्खे  के बारे में बतायेगे जो वैज्ञानिक सतर पर भी साबित हो चुका है |

इस 45 सेकंड्स की मसाज से आप सर दर्द , तनाव , नींद ना आना अन्यथा कई बिमारियों से छुटकारा पा सकते हो |

point

आपको करना क्या है ?

सबसे पहले अपने माथे पर आइब्रो के बीच में अपनी कोई भी उंगली रखे और 45 सेकंड्स के लिए इस पॉइंट को मसाज करे | इससे आपके दिमाग का तनाव कम हो जायेगा , सिर दर्द से रहत मिलेगी , मस्पेशियो का तनाव कम हो जायेगा , दिमागी शांति प्राप्त होगी , आखों में जो काम के कारण दबाव है , कम हो जएगा |

अगर आपको नींद ना आने की बीमारी है (इनसोम्निया) तो यह मसाज आपके लिए रामबाण है |


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दिल का दौरा

एक समय था जब दिल के दौरे अर्थात Heart Attack को सिर्फ वृद्धों की बिमारी माना जाता था किन्तु अब व्यक्ति किशोरावस्था में पैर रखते ही इसके शिकार होने लगते है और यही कारण है कि  आजकल दिल के मरीजों की संख्या दिन प्रतिदिन बढती जा रही है. वैसे चिकित्सकों का माना है कि अधिकतर रोगियों में हार्ट अटैक होने से 1 महीने पहले ही कुछ लक्षण देखे जा सकते है जिनको ध्यान में रखते हुए मरीज को तुरंत इलाज करा लेना चाहियें, ताकि हार्ट अटैक के खतरे को टाला जा सकते. आज हम आपको कुछ ऐसे ही संकेतों के बारे में बताने जा रहे है.

एक महीने पहले से सीने में हल्का दर्द, सांस लेने में दिक्कत, फ्लू की समस्‍या और घबराहट जैसे लक्षण दिखने देने लगते हैं। शोधकर्ताओं का मानना है कि अगर महीने भर पहले दिल के मरीजों में ये लक्षण पहचान लिए जाएं तो हार्ट अटैक को रोकने में काफी हद तक मदद मिल सकती है। आइए हार्ट अटैक के कई दिनों पहले से ही पता लगने वाले लक्षणों के बारे में जानें।

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फ्लू जैसे लक्षण

चिपच‍िपी और पसीने से तर त्वचा, थका हुआ और कमजोर महसूस होने को अक्‍सर लोग फ्लू के लक्षण माना जाता है लेकिन वास्तव में यह हार्ट अटैक के लक्षण हो सकते हैं। इसके अलावा सीने में भारीपन या दबाव की भावना को भी लोग चेस्‍ट कोल्‍ड और फ्लू होने के नाम से भ्रमित होते हैं लेकिन यह हार्ट अटैक के लक्षण हो सकते हैं। ऐसा कोई भी लक्षण दिखाई देेने पर तुरंत डाक्‍टर से संपर्क करें।

सांस की तकलीफ

सांस की तकलीफ और थकान में शरीर को आराम की जरूरत होती लेकिन यह दिल पर अतिरिक्त तनाव के कारण हार्ट अटैक का लक्षण भी हो सकता है। यदि बिना किसी कारण के अक्‍सर थकान होती है या हमेशा थका-थका महसूस हो तो यह परेशानी का सबब हो सकता है। थकान और सांस की तकलीफ महिलाओं में आम होती है और इसकी शुरुआत हार्ट अटैक होने से कई दिनों पहले जाती है।

चिंता

लगातार होनी वाली चिंता और घबराहट को जीवन में होने वाले विशिष्ट तनाव से नहीं जोड़ा जा सकता है। रात को सोने में कठिनाई होना या रात में चिंता या संकट की भावना के कारण अचानक से उठ जाना भी हृदयाघात के पहले से दिखने वाले लक्षण हैं।

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पल्‍स और हार्ट रेट की धड़कन तेज होना

कभी-कभी हार्ट अटैक से पहले दिखने वाले अधिक समान्‍य लक्षण जैसे तेजी से और अनियमित रूप से पल्‍स और हार्ट रेट का चलना हृदय की धड़कन में असामान्य तेजी के रूप में जाना जाता है। यदि यह समस्‍या अचानक से आ जाती हैं तो इस अवधि के दौरान आपका दिल बहुत तेजी से और मुश्किल से धड़कता हैं और यह हार्ट अटैक का लक्षण हो सकता है।

अधिक पसीना आना

बिना किसी काम और एक्‍सरसाइज के सामान्‍य से ज्याद पसीना आना हृदय की समस्याओं की पूर्व चेतावनी संकेत हैं। अवरुद्ध धमनियों के माध्यम से रक्त को दिल तक पंप करने के लिए बहुत अधिक प्रयास करना पड़ता हैं। जिससे आपके शरीर को अतिरिक्त तनाव में शरीर के तापमान को नीचा बनाए रखने के लिए अधिक पसीना आता है। अगर आपको बहुत अधिक पसीना आता है और चिपचिपी त्वचा का अनुभव होता है तो तुरंत अपने चिकित्सक से परामर्श करना चाहिए।

मतली और उल्टी

हार्ट अटैक से पहले हल्के अपच और अन्‍य गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याएं देखने को मिलती हैं लेकिन अक्‍सर इसको नजरअंदाज कर दिया जाता है क्‍योंकि हार्ट अटैक की समस्‍या आमतौर पर बड़े लोगों में पाई जाती है और उनमें आमतौर पर अधिक अपच की समस्‍या होती है। सामान्‍य रूप से पेट में दर्द, अपच, हार्ट बर्न या उल्‍टी की समस्‍या होना हार्ट अटैक का संकेत हो सकता है।

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शरीर के अन्‍य हिस्‍सों में दर्द

दर्द और जकड़न शरीर के अन्‍य हिस्‍सों में भी हो सकता है। इसमें बाहों, कमर, गर्दन और जबड़े में दर्द या भारीपन भी महसूस हो सकता है। कभी-कभी यह दर्द शरीर के किसी भी हिस्‍से से शुरू होकर सीधे सीने तक भी पहुंच सकता है। इन लक्षणों की अनदेखी नहीं करनी चाहिए और संभावित हार्ट अटैक के लिए इनकी जांच की जानी चाहिए।

परिपूर्णता की भावना

हार्ट अटैक के पहले से दिखने वाले लक्षणों में परिपूर्णता की भावना भी आती है। इसमें व्‍यक्ति को हर समय भरा हुआ सा महसूस होता है। ऐसा इसलिए होता है क्‍योंकि जब ऑक्सीजन युक्त रक्त संचार प्रणाली के माध्यम से नहीं जा पाता तब शरीर पेट में दर्द के संकेतों को भेजकर जवाब देता है।

सीने में दर्द, दबाव, और बेचैनी

हार्ट अटैक का सबसे सामान्य लक्षण है सीने में दर्द या बेचैनी हालांकि कुछ लोगों को बिल्कुल भी सीने में दर्द का अनुभव नहीं होता। छाती के बीच में बेचैनी, दबाव, दर्द, जकड़न और भारीपन अनुभव करने पर तुरंत डाक्‍टर से संपर्क कर उन्हें चैक करवाना चाहिए।

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सुबह खाली पेट पानी पीने के अनेको फायदे हैं। अगर आप अपनी बीमारियों को काबू में करना चाहते हैं तो रोज सुबह उठ कर ढेर सारा पानी पियें। खाली पेट पानी पीने से पेट की सारी गंदगी दूर हो जाती है और खून शुद्ध होता है जिससे आपका शरीर बीमारियों से दूर रहता है।

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हमारा शरीर 70% पानी से ही बना हुआ है इसलिये पानी हमारे शरीर को ठीक से चलाने के लिये कुछ हद तक जिम्‍मेदार भी है।

गर्म पानी पीने के  बडे़ फायदे  –

वॉटर थेरेपी ट्रीटमेंट और उसके लाभ

बेस्‍ट रिजल्‍ट पाने के लिये आपको सुबह उठते ही तुरंत 1.5 लीटर पानी जिसका मतलब है 5-6 गिलास पानी पीना चाहिये। पानी पीने के 1 घंटे तक कुछ भी ना खाएं। इसके अलावा आपको इस बात का भी ध्‍यान रखना चाहिये कि आपने रात में शराब का सेवन ना किया हो। तो चलिये देखते हैं कि सुबह खाली पेट पानी पीने से आपको कौन – कौन से फायदे हो सकते हैं।

पेट साफ रखे

सुबह कुछ भी खाने से पहले अगर आप पेट भर पानी पीते हैं तो आप पेट अच्‍छी तहर से साफ होगा जिस वजह से आपका शरीर पोषक तत्‍व को आसानी से ग्रहण कर पाएगा।

त्‍वचा बनाए चमकदार

कहा जाता है कि पानी आपके खून से घातक तत्‍वों को बाहर निकालता है जिससे त्‍वचा चमकदार बनती है।

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खून बनाए

खाली पेट पानी पीने से रेड ब्‍लड सेल्‍स जल्‍दी जल्‍दी बढने लगती हैं।

नई कोशिकाएं बनें

सुबह सबसे पहले पानी पीने से मासपेशियों और नई कोशिकाओं का निर्माण होता है।

आपकी भूख बढाए

पानी पी कर जब आपका पेट साफ हो जाता है, तब इस प्रकार से आपको भूख लगती है। इससे आपका सुबह का ब्रेकफास्‍ट अच्‍छा होता है।

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मोटापा घटाए

जब आप सुबह ठंडा पानी पीते हैं तब आपके शरीर का मैटाबॉलिज्‍म 24 % तक और बढ़ जाता है, जिससे आप जल्‍द ही वेट कम कर लेते हैं।

बीमारियां दूर करे

पानी पीने से गले की बीमारी, मासिक धर्म, कैंसर, आंखों की बीमारी, डायरियां, पेशाब संबन्‍धित बीमारी, किड़नी, टीबी, गठिया, सिरदर्द और तमाम तरह की बीमारियां आपके शरीर से दूर रहेंगी।


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कई लोगों का ऐसा मानना है कि केला खाने से वह मोटे होते हैं। केले की जगह वे सेब, अनार, अमरूद, तरबूज़, खरबूजा आदि फलों का सेवन करना ज़्यादा प्रभावशाली मानते हैं। यह सभी फल फाइबर युक्त होने के साथ शरीर में पानी की कमी को भी पूरा करने में मददगार साबित हैं। लेकिन कैल्शियम युक्त केला खाने से वह सोचते हैं कि वह मोटे हो जाएंगे।

अगर आप सेब पसंद करते हैं और केवल सेब के फायदों को ही जानते हैं, तो इस नए शोध को पढ़ने के बाद आप केले को भी पसंद करने लगेंगे. एक नए शोध में साबित हुआ है कि हर दिन एक केला खाने से अंधेपन का खतरा दूर होता है. शोधकर्ताओं ने अध्ययन के दौरान केले में कैरोटिनॉइड यौगिक पाया है. यह फलों, सब्जियों को लाल, नारंगी और पीला रंग देता है, जो लीवर में जाकर विटामिन ए में परिवर्तित हो जाते हैं, जो आंखों के लिए बहुत फायदेमंद है.

पिछले अनुसंधान में भी पता चला है कि कैरोटिनॉइड के उच्च स्तर वाले खाद्य पदार्थ भी खतरनाक रोगों जैसे कैंसर, हृदय रोग और मधुमेह से सुरक्षा प्रदान करते हैं.

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अध्ययन में पता चला है कि केला प्रोविटामिन ए कैरोटिनॉइड से भरपूर होता है, जो आंखों के लिए महत्वपूर्ण विटामिन ए की कमी को पूरा करने के लिए एक संभावित खाद्य स्रोत प्रदान कर सकता है.

विटामिन ए की कमी से निपटने के लिए शोधकर्ताओं ने केले में कैरोटिनॉइड को बढ़ावा वाले तरीकों की जांच की थी.

 


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अंत्रवृद्धि (हर्निया-आंत उतारना) क्या हैं

हर्निया पेट की दीवार की दुर्बलता से होता हैं। आम बोलचाल की भाषा में हर्निया पेट के किसी भी हिस्से में पैदा होने वाले उभार को कहा जाता हैं। इसे आंत उतारना भी कहा जाता हैं। व्यक्ति जब लेटता हैं तो यह उभार गायब हो जाता हैं। विशेषज्ञ बताते हैं के ये रोग ज़्यादातर पुरुषो को होता हैं। आइये जाने इस का उपचार

हर्निया के दर्जनो प्रकार पाये जाते हैं, लेकिन छोटी आंत के कारण पैदा होने वाले हर्निया इस प्रकार हैं।

  • मलद्वारगत
  • उदरगत
  • नाभिगत (अमबलाइकल)
  • इंग्वाइनल
  • पुराने शल्यक्रिया के घाव वाले स्थान पर (इंसीजनल)

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लक्षण

  • पेट में दर्द होना। यह दर्द निरंतर या कभी कभी हो सकता हैं।
  • नाभि क्षेत्र का किसी भी प्रकार से फूलना अथवा उसमे उभार महसूस होना।
  • पुरुषो के अंडकोष में हवा या पानी भरने जैसा महसूस होना। उल्लेखनीय हैं के ये लक्षण लेटने पर समाप्त हो जाते हैं।

कारण

  • कुपोषण श्रमिक अथवा अधिक वजन उठाने से।
  • वृद्धावस्था
  • लगातार खड़े रहना जैसे सेल्समैन, अध्यापक, बस कंडक्टर, सुपरवाइजर जैसे कार्य करने वाले लोग।
  • समय से पूर्व पैदा होने वाले बच्चे में ये अधिक होते देखा गया हैं।
  • मोटापा
  • लम्बे समय से कब्ज से पीड़ित रहना
  • लम्बे समय से खांसी से पीड़ित रहना

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घरेलु उपचार

  • मैगनेट बेल्टमेग्नेट का बेल्ट बाँधने से हार्निया में लाभ होता है।
  • त्रिफला – रात को सोते समय गुनगुने पानी के साथ १ चम्मच त्रिफला चूर्ण ले कर सोये।
  • नियमित रूप से दस ग्राम अदरक का मुरब्बा सवेरे खाली पेट सेवन करने से हर्निया रोग ठीक होता हैं। एक से दो महीने सेवन करने से ही प्रयाप्त लाभ होता हैं।
  • अरण्ड का तेल – अगर अंडकोष में वायु भरी हुयी प्रतीत हो तो एक कप दूध में २ चम्मच अरण्ड का तेल डालकर एक महीने तक पिलाये, इस से हर्निया सही होता हैं। और 1 से 10 मिलिग्राम अरण्डी के तेल में छोटी हरड़ का 1 से 5 ग्राम चूर्ण मिलाकर दे
  • नए रोग में कदम्ब के पत्ते पर घी लगाकर उसे आग पर हल्का सा सेक कर अंडकोष पर लपेट दे तथा लंगोट से बाँध ले।
  • कॉफ़ीकॉफ़ी ज़्यादा पीने से भी इस रोग में बहुत लाभ मिलता हैं।
  • चुम्बकीय चिकित्सा से भी बहुत लाभ मिलता हैं। इसके लिए आप किसी चिकित्सक से परामर्श करे।
  • नारायण तेल : नारायण तेल से मालिश करना चाहिए। मात्रा 1 से 3 ग्राम दूध के साथ पीना चाहिए।

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आयुर्वेदिक चिकित्सा

वृद्धिबाधिका वटी दो दो गोलिया दिन में दो बार ताज़ा पानी या बड़ी हरड़ के काढ़े के साथ ले।आयुर्वेद में इस औषिधि की बड़ी महिमा हैं, इसके नियमित सेवन से हर्निया तथा अंडकोष में वायु भरना, दर्द होना, पानी भरना इत्यादि लक्षण शांत होने लगते हैं। नए रोग की तो ये रामबाण दवा हैं।

यदि इस औषधि के सेवन से किसी का जी मिचलता हो या बेचैनी होती हो तो निम्बू की शिकंजी या काला नमक मिलायी हुई छाछ के साथ औषिधि ग्रहण करवाये। इस औषिधि के तुरंत बाद गर्म तासीर वाले कोई भी आहार ना ले जैसे चाय कॉफ़ी गरमा गर्म दूध इत्यादि। अगर सेवन करना हो तो एक घंटे के बाद ही कुछ सेवन करे।यदि साथ में कब्ज रहता हो तो वृद्धिबाधिका वटी के साथ साथ आरोग्यवर्धनी वटी दो दो गोलिया दिन में दो बार अवश्य ही सेवन करे।

रखे ध्यान

  • अंडरवियर हमेशा टाइट अथवा लंगोट धारण करे।
  • शरीर का वजन नहीं बढ़ने दे। मोटापे पर लगाम रखे।
  • मल त्यागते समय मल बाहर निकालने के लिए ज़ोर नहीं लगाये।
  • क्षमता से अधिक वजन भूलकर भी ना उठाये।
  • कब्ज़ न रहने दे।
  • खांसी को बढ़ने नहीं दे तथा आयुर्वेदीय पथ्य का पालन करते हुए समय रहते ही इसका इलाज कराये।
  • हर्निया के बीमारो को कम खाना चाहिए।
  • ऐसा ऑपरेशन चीरा लगा हो उसमे पर्याप्त आराम करे।

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ब्रौनकियल नलियाँ, या ब्रौन्काई, श्वास की नली को फेफड़ों के साथ जोड़ती हैं । ब्रौनकियल नलियाँ जब ज्वलनशील या संक्रमित हो जाती हैं, तो उस अवस्था को ब्रौनकाईटिस कहते हैं। ब्रां‍काइटिस फेफड़ों में बहती हुई हवा और ऑक्सीजन के प्रवाह को कम कर देती है, जिससे वायु मार्ग में प्रचंड रूप से कफ़ और बलगम का निर्माण होता है।

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कितने प्रकार की होती है ब्रांकाइटिस

ब्रांकाइटिस दो प्रकार के होते हैं, तीव्र और दीर्घकालीन। तीव्र ब्रांकाइटिस की बीमारी अल्पकालीन होती है जो कि विषाणु जनित रोग फ्लू या सर्दी-ज़ुकाम के होने के बाद विकसित होती है। इसके लक्षण बलगम के साथ सीने में बेचैनी या वेदना, बुखार और कभी कभी श्वाश में तकलीफ का होना होता है। तीव्र ब्रौनकाईटिस कुछ दिनों या कुछ हफ़्तों तक जारी रहती है । दीर्घकालीन ब्रां‍काइटिस की विशेषताएं होती हैं, महीने के अधिक से अधिक दिनों, वर्ष में तीन महीनों, और लगातार दो वर्षों तक और किसी दूसरे कारण के अभाव में, बलगम वाली अनवरत खाँसी का जारी रहना। दीर्घकालीन ब्रांकाइटिस के रोगी सांस की विभिन्न तकलीफें महसूस करते हैं, और यह अवस्था वर्ष के अलग भागों में बेहतर या बदतर हो सकती है ।

ब्रांकाइटिस के कारण क्या हैं?

तीव्र ब्रांनकाइटिस उसी विषाणु के कारण होती है जिसके कारण सर्दी-ज़ुकाम और फ्लू होते हैं और दीर्घकालीन ब्रांकाइटिस ज़्यादातर धूम्रपान से होती है। यद्यपि, दीर्घकालीन ब्रां‍काइटिस तीव्र ब्रां‍काइटिस के अनवरत हमले के कारण भी होती है। इसके अलावा प्रदूषण, धूल, विषैले गैस, और अन्य औद्योगिक विषैले तत्व भी इस अवस्था के ज़िम्मेदार होते हैं। ब्रौन्काई में सूजन या जलन, खाँसी, श्वेत, पीले, हरे या भूरे रंग के बलगम का निर्माण, हाँफना, साँस की घरघराहट, थकावट, बुखार और सर्दी ज़ुकाम, सीने में पीड़ा या बेचैनी, बंद या बहती नाक आदि ब्रोंकाइटिस के लक्षण होते है। धूम्रपान करने,कमजोर प्रतिकारक क्षमता, वरिष्ठ और शिशु आदि को इसकी समस्या होने का खतरा ज्यादा रहता है।

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ब्रांकाइटिस के आयुर्वेदिक उपचार

ब्रांकाइटिस की बीमारी आजकल तेज़ गति से बढ़ रही है, और खासकर के बच्चे इस बीमारी के शिकार जल्दी होते हैं। दूध में शक्कर की बजाय 1 या 2 चम्मच शहद मिलाकर पिलाने से ब्रांकाइटिस से काफी हद तक राहत मिलती है। अगर नियमित रूप से दूध में शहद मिलाकर पिलाया जाये तो खांसी तुरंत भाग जायेगी और वापस नहीं आएगी।

  • सौंठ और हरड का चूरा बनाकर अच्छी तरह मिला दें, और इस चूरे का आधा चम्मच 2 चम्मच शहद के साथ मिलाकर सेवन करें, इससे ब्रांकाइटिस के उपचार में सहायता मिलती है।15 ग्राम गुड़ के साथ 5 ग्राम सौंठ मिलाकर एक महीने तक नियमित रूप से सेवन करने से भी ब्रांकाइटिस में राहत मिलती है।
  • एक गिलास दूध में चुटकी भर हल्दी डाल कर उबाल लें फिर इसे खाली पेट एक चम्मच देशी घी के साथ दिन में दो या तीन बार लें। इस उपाय को हर रोज अपनाने से ब्रोंकाइटिस की समस्या धीरे-धीरे खत्म हो जाएगी।
  • लहसुन की दो तीन कलियों को काट कर दूध में डाल कर उबाल लें और रात को सोने से पहले पी लें।यह एक अच्‍छा एंटीबायोटिक है। इसमें एंटी वाइरल तत्‍व पाए जाते हैं। जितना हो सके उतना पानी पियें। वहीं कैफीन और एल्कोहल का सेवन न करें क्योंकि इनसे यूरीन अधिक होती है और शरीर का जल स्‍तर कम हो जाता है।
  • सौंठ और दालचीनी को सामान मात्रा में पीसकर उसका चूरा बना लें, और इस चूरे का एक चम्मच आधे ग्लास पानी में मिलाकर उसे उबाल लें, और एक ही सांस में गरमागरम पी लें। इससे भी ब्रांकाइटिस से तुरंत राहत मिलती है।
  • अदरक के रस के 2 चम्मच शहद के दो चम्मच शहद के साथ सेवन करने से भी ब्रांकाइटिस से राहत मिलती है। नियमित रूप से एक सेब का सेवन या 1 या 2 चम्मच आंवले के जाम का सेवन भी ब्रांकाइटिस की राहत में काफी सहायक सिद्ध होता है।

ब्रोंकाइटिस के रोगियों को धूम्रपान बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए। उन लोगों से थोड़ा दूर रहें जो सर्दी-ज़ुकाम से ग्रस्त हैं। हर वर्ष फ्लू का टीका लगवाएं।निमोनिया का टीका भी लगवाना चाहिए, खासकर 60 वर्ष से ऊपर की उम्र वालों को। नियमित रूप से हाथों को अच्छी तरह से धोएं, खासकर कुछ खाने से पहले। नम, सर्द और प्रदूषण वाली जगहों से दूर रहें।


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अर्थात् ओउम् तीन अक्षरों से बना है, जो सर्व विदित है । अ उ म् । “अ” का अर्थ है उत्पन्न होना, “उ” का तात्पर्य है उठना, उड़ना अर्थात् विकास, “म” का मतलब है मौन हो जाना अर्थात् “ब्रह्मलीन” हो जाना। ॐ सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति और पूरी सृष्टि का द्योतक है। ॐ का उच्चारण शारीरिक लाभ प्रदान करता है। जानें, ॐ कैसे है स्वास्थ्यवर्द्धक और अपनाएं आरोग्य के लिए मात्र ॐ के उच्चारण का मार्ग…

इस मंत्र का प्रारंभ है अंत नहीं। यह ब्रह्मांड की अनाहत ध्वनि है। अनाहत अर्थात किसी भी प्रकार की टकराहट या दो चीजों या हाथों के संयोग के उत्पन्न ध्वनि नहीं। इसे अनहद भी कहते हैं। संपूर्ण ब्रह्मांड में यह अनवरत जारी है।

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उच्चारण की विधि

प्रातः उठकर पवित्र होकर ओंकार ध्वनि का उच्चारण करें। ॐ का उच्चारण पद्मासन, अर्धपद्मासन, सुखासन, वज्रासन में बैठकर कर सकते हैं। इसका उच्चारण 5, 7, 10, 21 बार अपने समयानुसार कर सकते हैं। ॐ जोर से बोल सकते हैं, धीरे-धीरे बोल सकते हैं। ॐ जप माला से भी कर सकते हैं।

ॐ के उच्चारण से शारीरिक लाभ

  • इससे शरीर में फिर से युवावस्था वाली स्फूर्ति का संचार होता है।
  • अनेक बार ॐ का उच्चारण करने से पूरा शरीर तनाव-रहित हो जाता है।
  • ॐ के दूसरे शब्‍द का उच्‍चारण करने से गले में कंपन पैदा होती है जो कि थायरायड ग्रंथी पर प्रभाव डालता है।
  • अगर आपको घबराहट या अधीरता होती है तो ॐ के उच्चारण से उत्तम कुछ भी नहीं।
  • ॐ के पहले शब्‍द का उच्‍चारण करने से कंपन पैदा होती है। इन कंपन से रीढ़ की हड्डी प्रभावित होती है और इसकी क्षमता बढ़ जाती है।
  • यह शरीर के विषैले तत्त्वों को दूर करता है, अर्थात तनाव के कारण पैदा होने वाले द्रव्यों पर नियंत्रण करता है।
  • कुछ विशेष प्राणायाम के साथ इसे करने से फेफड़ों में मज़बूती आती है।
  • यह हृदय और ख़ून के प्रवाह को संतुलित रखता है।
  • नींद न आने की समस्या इससे कुछ ही समय में दूर हो जाती है। रात को सोते समय नींद आने तक मन में इसको करने से निश्चित नींद आएगी।
  • इससे पाचन शक्ति तेज़ होती है।
  • थकान से बचाने के लिए इससे उत्तम उपाय कुछ और नहीं।

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